भारत के प्रमुख लोक नृत्य: राज्यों की पूरी सूची, इतिहास और तथ्य | Folk Dances of India GK
भारत के प्रमुख लोक नृत्य: राज्यों की पूरी सूची, इतिहास और तथ्य
परिचय: भारत की आत्मा का नृत्य
नमस्कार दोस्तों! M S WORLD The WORLD of HOPE में आपका स्वागत है। भारत एक ऐसा देश है जहाँ की संस्कृति उसके गाँवों, खेतों और त्योहारों में बसती है। इसी संस्कृति की सबसे जीवंत और रंगीन अभिव्यक्ति हैं यहाँ के **लोक नृत्य (Folk Dances)**। ये नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि किसी समुदाय के इतिहास, उसकी मान्यताओं, खुशियों और जीवन-शैली का दर्पण होते हैं। फसल की कटाई से लेकर शादियों और त्योहारों तक, हर अवसर का जश्न इन लोक नृत्यों के बिना अधूरा है।
शास्त्रीय नृत्यों के कठोर नियमों के विपरीत, लोक नृत्य सहज और सामूहिक होते हैं, जिनमें हर कोई शामिल हो सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में 'कला और संस्कृति' खंड के तहत यह एक बेहद महत्वपूर्ण विषय है। इस लेख में हम भारत के विभिन्न राज्यों के प्रमुख लोक नृत्यों की एक विस्तृत सूची देखेंगे, कुछ प्रसिद्ध नृत्यों के इतिहास और प्रदर्शन शैली को जानेंगे, और इस विषय पर आधारित एक महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी भी हल करेंगे।
इस लेख में आप जानेंगे (Table of Contents):
1. राज्यानुसार भारत के प्रमुख लोक नृत्यों की सूची
| राज्य | प्रमुख लोक नृत्य |
|---|---|
| पंजाब | भांगड़ा, गिद्दा, किकली |
| गुजरात | गरबा, डांडिया रास, भवई, टिप्पनी |
| राजस्थान | घूमर, कालबेलिया, चरी, तेरहताली, कठपुतली |
| हरियाणा | धमाल, फाग, घूमर, सांग |
| महाराष्ट्र | लावणी, कोली, तमाशा, दिंडी |
| उत्तर प्रदेश | रासलीला, नौटंकी, कजरी, चरकुला |
| बिहार | जाट-जटिन, बिदेसिया, झिझिया |
| असम | बिहू, बगुरुम्बा, झुमुर |
| पश्चिम बंगाल | छाऊ, गंभीरा, बाउल, कीर्तन |
| ओडिशा | घुमुरा, संबलपुरी, छाऊ |
| केरल | थिरुवाथिराकाली, थेय्यम, ओट्टमथुल्लल |
| कर्नाटक | यक्षगान, डोलू कुनिथा, हुलि वेशा |
| तमिलनाडु | करगट्टम, कुम्मी, कोलाट्टम |
| आंध्र प्रदेश | धीम्सा, लम्बाडी, कुचिपुड़ी (शास्त्रीय और लोक दोनों रूप) |
| जम्मू और कश्मीर | रऊफ, दुमहल, हिकात |
| हिमाचल प्रदेश | नाटी, छम, डांगी |
| मध्य प्रदेश | जवारा, मटकी, गौर मारिया |
| छत्तीसगढ़ | पंथी, राउत नाच, पंडवानी |
| झारखंड | छाऊ, सरहुल, करमा |
| अरुणाचल प्रदेश | मुखौटा नृत्य (War Dance), अजी लामू |
2. कुछ प्रसिद्ध लोक नृत्यों का विस्तृत परिचय
भांगड़ा और गिद्दा (पंजाब)
- कहाँ: पंजाब
- कब और क्यों: भांगड़ा मूल रूप से बैसाखी के फसल उत्सव को मनाने के लिए पुरुषों द्वारा किया जाता था। यह जोश, खुशी और उत्सव का प्रतीक है। गिद्दा महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक ऊर्जावान नृत्य है, जो अक्सर विवाह या त्योहारों पर किया जाता है।
- कैसे: भांगड़ा ढोल की तेज धुन पर किया जाता है, जिसमें ऊँची किक और कंधों के ऊर्जावान mouvements शामिल होते हैं। गिद्दा में गोलाकार घेरे में ताली बजाते हुए और लोकगीत (बोलियाँ) गाते हुए नृत्य किया जाता है।
गरबा और डांडिया (गुजरात)
- कहाँ: गुजरात
- कब और क्यों: गरबा मुख्य रूप से नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान देवी दुर्गा की पूजा के लिए किया जाता है। यह स्त्रीत्व और जीवन के चक्र का प्रतीक है। डांडिया रास कृष्ण और गोपियों की रासलीला का एक प्रतीकात्मक मंचन है।
- कैसे: गरबा में महिलाएं एक छिद्रित मिट्टी के बर्तन (गरबो) के चारों ओर गोलाकार नृत्य करती हैं, जिसमें एक दीपक जला होता है। डांडिया में पुरुष और महिलाएं रंगीन डंडियों (डांडिया) के साथ एक लयबद्ध तरीके से नृत्य करते हैं।
बिहू (असम)
- कहाँ: असम
- कब और क्यों: बिहू असम के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार का नाम भी है और नृत्य का भी। यह मुख्य रूप से 'रोंगाली बिहू' (अप्रैल में असमिया नव वर्ष) के दौरान वसंत के आगमन और कृषि चक्र का जश्न मनाने के लिए किया जाता है।
- कैसे: यह तेज गति का नृत्य है जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों भाग लेते हैं। इसमें तेज कदमों और हाथों के फुर्तीले mouvements के साथ पारंपरिक असमिया संगीत पर नृत्य किया जाता है।
घूमर (राजस्थान)
- कहाँ: राजस्थान
- कब और क्यों: घूमर मूल रूप से भील जनजाति द्वारा देवी सरस्वती की पूजा के लिए शुरू किया गया था, जिसे बाद में राजपूताना समुदायों ने अपना लिया। यह विशेष रूप से त्योहारों, शादियों और अन्य शुभ अवसरों पर महिलाओं द्वारा किया जाता है।
- कैसे: इस नृत्य का मुख्य आकर्षण महिलाओं का घूमना है। वे लंबा, भारी और रंगीन घाघरा पहनकर एक विस्तृत घेरे में घूमती हैं, जिससे एक मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य बनता है।
3. यूनेस्को और भारतीय लोक नृत्य: महत्वपूर्ण तथ्य
यूनेस्को (UNESCO) दुनिया भर की महत्वपूर्ण अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों (Intangible Cultural Heritage) को मान्यता देता है और उनके संरक्षण को बढ़ावा देता है। भारत के कई लोक नृत्य इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हैं:
- कालबेलिया (राजस्थान): इसे 2010 में यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया था। यह सपेरा जनजाति का एक प्रसिद्ध नृत्य है।
- छाऊ (पूर्वी भारत): पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा का यह पारंपरिक नृत्य 2010 में सूची में जोड़ा गया।
- गरबा (गुजरात): यह सबसे नवीनतम जुड़ाव है। गुजरात के गरबा को **दिसंबर 2023** में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया, जो भारत के लिए एक गर्व का क्षण है।
4. प्रमुख लोक नृत्यों पर महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (MCQ)
1. 'भांगड़ा' किस राज्य का प्रसिद्ध लोक नृत्य है?
उत्तर: (c) पंजाब
2. 'गरबा' नृत्य किस त्योहार के दौरान किया जाता है?
उत्तर: (d) नवरात्रि
3. 'घूमर' किस भारतीय राज्य का पारंपरिक लोक नृत्य है?
उत्तर: (c) राजस्थान
4. 'बिहू' किस राज्य का लोक नृत्य है?
उत्तर: (a) असम
5. 'लावणी' किस राज्य का प्रसिद्ध लोक नृत्य है?
उत्तर: (c) महाराष्ट्र
6. 'रऊफ' लोक नृत्य का संबंध किस राज्य/केंद्र शासित प्रदेश से है?
उत्तर: (d) जम्मू और कश्मीर
7. 'यक्षगान' किस राज्य की एक पारंपरिक नृत्य-नाटिका है?
उत्तर: (c) कर्नाटक
8. हाल ही में (2023 में) किस भारतीय नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया?
उत्तर: (c) गरबा
9. 'कालबेलिया' नृत्य किस भारतीय राज्य से संबंधित है?
उत्तर: (b) राजस्थान
10. 'गिद्दा' नृत्य मुख्य रूप से किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर: (b) महिलाओं द्वारा
11. 'नौटंकी' किस राज्य का एक प्रमुख लोक नाट्य है?
उत्तर: (c) उत्तर प्रदेश
12. 'छाऊ' नृत्य भारत के किस क्षेत्र में प्रचलित है?
उत्तर: (d) पूर्वी भारत (बंगाल, झारखंड, ओडिशा)
13. 'डांडिया रास' में डांडिया किसका प्रतीक है?
उत्तर: (c) देवी दुर्गा की तलवार का
14. 'जाट-जटिन' लोक नृत्य किस राज्य से संबंधित है?
उत्तर: (c) बिहार
15. 'नाटी' किस राज्य का प्रसिद्ध लोक नृत्य है?
उत्तर: (c) हिमाचल प्रदेश
5. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है?
शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance) व्याकरण और नियमों से बंधे होते हैं, इन्हें सीखने के लिए वर्षों के कठोर प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है (जैसे भरतनाट्यम, कथक)। इसके विपरीत, लोक नृत्य (Folk Dance) सहज होते हैं, इनके नियम सरल होते हैं और ये किसी समुदाय की सामूहिक अभिव्यक्ति होते हैं, जिन्हें विशेष अवसरों पर एक साथ मिलकर किया जाता है।
प्रश्न 2: क्या एक ही लोक नृत्य कई राज्यों में प्रचलित हो सकता है?
हाँ, यह संभव है। सांस्कृतिक सीमाओं और राज्यों की भौगोलिक निकटता के कारण कुछ लोक नृत्य एक से अधिक राज्यों में थोड़े-बहुत बदलाव के साथ प्रचलित हो सकते हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण 'छाऊ' नृत्य है, जो पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा तीनों राज्यों में लोकप्रिय है। इसी तरह, घूमर हरियाणा और राजस्थान दोनों में पाया जाता है।
प्रश्न 3: यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची का क्या महत्व है?
इस सूची में शामिल होने से किसी भी सांस्कृतिक परंपरा (जैसे नृत्य, त्योहार) को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है। यह उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है और उस परंपरा से जुड़े कलाकारों और समुदायों को प्रोत्साहित करता है। यह पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
6. निष्कर्ष
भारत के लोक नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विविधता और एकता की धड़कन हैं। ये नृत्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारी परंपराओं, कहानियों और सामाजिक ताने-बाने को जीवित रखते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह विषय न केवल अंक दिलाने वाला है, बल्कि हमें अपने देश की समृद्ध विरासत से भी जोड़ता है। हमें उम्मीद है कि यह विस्तृत लेख आपको भारत के लोक नृत्यों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।
यह जानकारी आपको कैसी लगी, हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं। M S WORLD The WORLD of HOPE के साथ ज्ञान की इस यात्रा में बने रहने के लिए आपका धन्यवाद!
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें